मां-बाप के प्यार को कोई भी भूल पाता नहीं,
सच्चा प्रेम करने वाला प्रेम मे दिखावा करता नहीं ।
बच्चे के रोने से ही जो हर बात समझ ले माँ-बाप होते हैं वही,
केवल यही रिश्ता है जिसमें किसी दिखावे की आवश्यकता होती नहीं ।
जहाँ प्रेम को दिखाना पड़े वहाँ प्रेम की भावना होती ही नहीं
,निस्वार्थ प्रेम कीजिए जिसमें कुछ खोने का डर होता नहीं
