कल शर्मा जी ने अपने मित्रों की आपातकालीन मिटिंग बुलाई, मिटिंग में सभी से मदद की गुहार लगाई!
बोले बचा लो, बचा लो मुझे मेरे भाई, नहीं करोगे कुछ तुम तो , होगी मेरे ही घर से आज मेरी विदाई,
हमने पूछा ऐसा क्या हुआ जो ये विपदा है आई, तब शर्मा जी ने अपनी आपबीती सुनाई,
बोले फेसबुक पर एक सुंदर युवती नजर आई,उसे देखते ही जल्दी से मित्रता की अर्जी लगाई,
तभी दौड़ते–दौड़ते तुम्हारी भाभी कमरें में आई,बोली तुमने खुद को अविवाहित बताने की कैसे गुस्ताखी दिखाई,
मैंने पूछा प्रिय किसने तुम्हारे दिल में है शंका की अग्नि जलाई, प्रिय कभी देखा है तुमने कि किसी ने है अपनी गलती दोहरायी,
वो बोली जिसे तुमने मित्रता की अर्जी भिजवाई वो और कोई नहीं वो है तुम्हारी लुगाई, तुम्हें पकड़ने की मैंने ये युक्ती लगाई,
मैंने भी अपनी नकली फेसबुक आई– डी बनाई,अपनी व्यथा सुनाकर जो मैंने नजरें उठाई,
सब मित्रों ने छड़ी उठाई बोले तू ही है जिसके कारण हम सब पर भी विपदा है आई, हमारी पत्नियों ने भी हमारी फेसबुक आई–डी पर जांच है बैठाई, अब तेरे साथ हमारी भी होगी धुलाई .
तभी हमारे मित्र ने एक युक्ति सुझाईबोले माफी से ही होगी अब हम सबकी रिहाई,
बोले इस घटना से हमने ये शिक्षा है पाई, की बीवी से कुछ नहीं छुपता मेरे भाई,वो ही है सर्वे–सर्वा वो देगी माफी तो ही होगी रिहाई.

Happy Blogging….
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