वो बचपन की सहेलियां, जिनके संग की अठखेलियाँ,
मिलकर खेले सब बचपन के खेल स्टापू, लूडो, छुपन- छुपाई और कौड़ीयां,
जाने खेल-खेल में मिलकर बनाई ,कितने गुड्डै-गुड़ियों की जोड़ियां,
जिनके संग खूब खाई हमने,चाट, पकौड़े,जलेबी और कचौड़ियां,
एक-दूजे संग बांटते थे कपड़े हों या चूड़ियां!
लड़ते-झगड़ते पर सह नहीं पाते थे एक-दूजे से दूरियां,
एक-दूजे के चेहरे से ही पढ़ लेते थे,सुख-दुख के कारण और मजबूरियां!
हमारे सब राज़ों की राज़दार होती हैं सहेलियां,
मां-बाप, भाई-बहन , हर रिश्ते की तरह ही प्यारी होती है सहेलियां!
