ये कैसी बिमारी है आई,जिसने सारी दुनिया है हिलाई !
इसे मामूली समझने की सबने कितनी बड़ी कीमत है चुकाई !
किसी पिता, किसी माता, किसी भाई, किसी बहन ने जान है गंवाई !
मौतौं का सिलसिला तब तक नहीं थमेगा भाई, जब तक दिखाओगे यूं ही लापरवाही,
थोड़ी सी सावधानी अपनाकर यदि जा सकती है तुम्हारी जान बचाई, तो क्यों नहीं पालन करते लॉकडाउन का मेरे बहन–भाई !
पुलिस,डॉक्टर,स्वास्थयकर्मी सभी ने तुम्हारे लिए जान दांव पर है लगाई, पर तुमने एक ना मानी और लॉकडाउन तोड़ने की जैसे जिद है लगाई,
अब बढ़ गया कोरेना तो सरकार पर क्यो़ं उंगली है उठाई,
यदि पहले बरतते सावधानी और होती उचित दूरी अपनाई, तो कोरोना की कब की हो गयी होती विदाई !
नकारात्मक सोच को छोड़ो की इस लॉकडाउन से मैंने आजादी है गंवाई,
सकारात्मक सोच अपनाओं की इस लॉकडाउन में , मैंने अपने परिवार संग कितनी यादें हैं बनाई !
