( एक नन्हा फ़रिश्ता )

एक नन्हा फ़रिश्ता आया है, अपनी मासूम शरारतों से उसने उत्पात मचाया है ।

ख़ुद तो शरारत करता है , मुझे भी शरारती बनाया है ।

बोलना देर से सीखा मगर, उस छोटी उम्र में ही गेम्स में हाथ जमाया है ।

कुछ देर ना देखे मुझे तो, सारा घर सर पर उठता है ,अपने सामने पा मुझे, बार बार गले लगाता है ।

जब भी जाती बाहर कहीं , मेरा दुपट्टा माँगने लग जाता है,पूछो गर क्या करना है, बोले मम्मा ये आपका एहसास कराता है ,

बस उसका ये बोलना ही, मेरे दिल को छू जाता है ।

बहन का है लाडला , फिर भी लड़ने से बाज़ नहीं आता है ,

चोटी खींचे, चुंटी काटे, लड़ाई के लिए हर पैंतरा आज़माता है ,

जब हो जन्मदिन के उपहारों की बात, तब बहन के साथ एकता दिखलाता है ।

अपने सवालों की झ़ड़ी लगाकर , अपने पिता का इम्तिहान लेना चाहता है ,

जब तक वो अपने बाल ना नोंचें , तब तक सवाल पूछता जाता है ।

खाने का शौक़ीन है इतना,की लोरी में भी पकवानों की लिस्ट बनवाता है ,

एक भी पकवान गर छूट गया, लोरी रोक कर उनको शामिल करवाता है ।

अपनी भोली सूरत का वो फ़ायदा बहुत उठाता है, सारी शरारत करके मासूम बनकर खड़ा हो जाता है ।

अपनी इन्हीं मासूम शरारतों के कारण , मेरा लल्ला सबका लाड़ला बन जाता है ।

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