( फ़रेब )

हमारे अपनों ने ही हमारा दिल दुखाया है, जिनसे उम्मीद थी सहारे की, उन्हीं से ज़ख़्म पाया है।

सभी ने स्वाँग रचने वालों के झूठे आँसुओं को पोंछने के लिए हाथ बढ़ाया है,

और हमारे आँसुओं को देखने के लिए नज़रों को भी नहीं उठाया है ।

इनके इस व्यवहार ने हमें इतना समझाया है, कि दिखावे का ज़माने में , हर किसी को दिखावा ही पसंद आया है।

इसलिए मीठी ज़ुबान ने हर फरेबी को संत का ओहदा और सच्चे इंसान के हर कार्य पर संदेह जताया है ।

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