माँ अगर धरती है , तो आसमान है पिता । हमारे अस्तित्व की पहचान है पिता ।
माँ से अगर यह देह है तो इसमें बहता रक्त है पिता ।हमारे अस्तित्व की पहचान है पिता ।
उँगली पकड़कर चलना सिखाता है पिता ।गिर जाएँ जिंदगी की दौड़ में तो उत्साह बढ़ा कर उठाता है पिता ।
ख़ुद की ख़्वाहिशें दबाकर , हमारी ख़्वाहिशें पूरी करता है पिता ।
हमारी हर छोटी-बड़ी ,ज़रूरतों का ख़्याल रखता है पिता ।
संसार में हमारी पहचान होता है पिता,पर जब हमारे नाम और काम से जाना जाता है पिता ।
तब सबके आगे गर्व से सिर उठा ,सीना चौड़ा कर इतराता है पिता ।
बाहर से अपने को कितना भी सख़्त दिखाता है पिता,पर अंदर से माँ की तरह ही संवेदनशील होता है पिता ।
माँ को ही भगवान का दर्जा हम देते हैं सदा ,पर माँ अगर पार्वती का रूप हैं तो साक्षात् महादेव हैं पिता ।
माँ अगर दिल है तो धड़कन है पिता ,
हमारे अस्तित्व की पहचान है पिता ।।
और अन्त में ,
अल्फाज़ हैं मेरे, पर मेरा एहसास है पिता,
कलम मेरी है दोस्तों, पर मेरा ज्ञान हैं पिता!
