( शहीदों को सलाम )

रोना नहीं है हमको, अब उनको रुलाना है


जान ली जिसने हमारे जवानों की,
उस चीन को , उसकी असली औकात दिखाना है,


डर जाए सपनें में भी, गर देखे हमारे जवानों को , इस कदर यारों उसका सुख-चैन उड़ाना है ,

शहादत को जवानों की बेकार ना करना है, काटकर सिर दुश्मन का शहीदों की समाधी पर चढ़ाना है,


देख तिरंगा हमारा उनकी रुह में कंपन हो, अब उसके अंदर अब इतना खौफ बिठाना है,


पर उससे पहले यारों हमें आपसी मतभेदों को मिटाना है, और अपने जवानों को ये विश्वास दिलाना है,

साथ हम भी खड़े है उनके, अब कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन को सबक सिखाना है!



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