( इम्तिहान )

क्या पता था कि अपनो के हाथों मात खांएगें,

जिनकी राहें फूलों से सजाई हमने, वो ही हमारे लिए काँटे बिछाएँगे।

काँटे बिछाने वाले भी अब झटका खाएँगे ,

जब काँटों में भी हमें मुस्कुराता पाएँगे

अपनी हर मुस्कुराहट से खुदा को भी ये बताएँगे,

कितने भी ले लो इम्तिहान,आपकी हर परीक्षा में हम अव्वल ही आएँगे

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