ज़िन्दगी भी कैसे–कैसे रंग दिखाती है,एक पल सुख, तो दूसरे ही पल दु:ख से रुबरु कराती है,
सुख का पहिया इतनी तेज़ी से घुमाती है,कि खुशियां सुहाने स्वप्न की तरह पल में ओझल हो जाती हैं!
दु:ख का पहिया इतनी धीमी गति से चलाती है, कि हर पल, हर घड़ी में पूरी ज़िन्दगी का सार समझा जाती है!
इसलिए पलभर की ज़िन्दगी हंसी–खुशी से बितानी है, मिलजुल कर हमको यादें अच्छी बनानी हैं,
उस विधाता को अपनी जिंदादिली दिखानी है!
