बचपन सब से प्यारा होता है, उसमें मन बिल्कुल साफ़ होता है।
अपनों से ही रूठना मनाना होता है, फिर कुछ ही पलों में उनके साथ नाचना गाना होता है।
लोग क्यों कहते हैं कि बचपन मुड़कर नहीं आता, क्योंकि बड़े होकर हमें अपना अहं बहुत प्यारा होता है।
बचपन जैसी जिंदगी चाहिए , तो हमें फिर बच्चा बनना होगा,
कभी अपनों से रूठना है तो उन्हें मनाना भी होगा।
एक दूसरे से टॉफ़ी चाकलेट बाँटी है तो ,
अब सुख दुख जो भी हो बाँटना होगा।
