मां की प्यारी बेटियां, पापा की दुलारी बेटियां,
परिवार का मान बेटियां, पापा की जान बेटियां,
घर को अपनी किलकारीयों से भरती बेटीयां,
अपने प्यार की खुश्बू से बाबुल का घर महकाती बेटियां,
मां-बाप के दु:ख में सबसे पहले आंखे भिगोती बेटियां,
मां-बाप के कलेजे का गर टुकड़ा होती हैं बेटियां,
फिर क्यों शादी के बाद पराई हो जाती हैं बेटियां,
जिस घर जन्में वहां पराई, जिस घर विवाह कर जाएं वहां भी पराई ही कहलाती हैं बेटियां,
दोनों परिवारों को संपूर्ण घर बनाती हैं बेटियां,
लक्ष्मी, दुर्गा के रुप में पूजी जाती हैं बेटियां,
फिर भी पराई ही क्यों कहलाती बेटियां ?
जिस भी ह्र्दयहीन ने ये रिवाज बनाया होगा,
निश्चित ही खुदा ने उसके घर बेटी को नहीं जाया होगा!
