( सुनहरे पल )

थाम तुम्हारी बाहें जब इस घर में मैं आई,
रंगबिरंगे सपनों से थी आंखें जगमगाई ।

अपने प्यार के रंगों से तुमने मेरी दुनियाँ सजाई,
जिंदगी की इन कंटीली राहों पर चोटें भी खाई ।

और उन चोटों पर तुमने अपने प्यार की दवा थी लगाई,
फिर निकाल कांटे सारे, मेरी राहें फूलों से सजाई

कुछ सपनें जो छूटे थे, उनसे फिर से भेंट कराई,
मेरे नखरों को पूरा करने में सदा खुशी जताई

प्यार दिया, सत्कार दिया,अपने जीवन में मेरी एक खास जगह भी बनाई,

सब कहते हैं कि हमारी जोड़ी भगवान ने है बनाई,
जुआ खेला था हमनें जिसमें हमारी लाटरी है निकल आई

महादेवपार्वती सी अपनी जोड़ी है बनाई, तभी एकदूसरे के साथ हमने संपूर्णता है पाई

अब कोई इच्छा नहीं दिल में, ना ही सपना है बाकी,
बस इतनी सी तमन्ना है,तेरे हाथ में मेरा हाथ रहे साथी,

जिंदगी के अंतिम पल तक मेरे लबों पर तेरा नाम रहे साथी!

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