झूठे रिश्तों की ये कैसी दलदल है,
दम घुट रहा जिसमें हमारा हर पल है।
रिश्तों में उठी ये कैसी हलचल है,
हर अपना झूठ से लिपा, दिखता आजकल है।
किस पर विश्वास करें ये दुविधा प्रतिपल है,
झूठे लोगों से आकर्षित हर कोइ आजकल हैं।
सच्चे लोगों का, प्रताड़ना से भरा हर पल है।
