आज घर घर में ये कैसी महाभारत छिडी़ है ,
अपनों के ही बीच ये कैसी होड़ लगी है,
हर कोई अपने को अपनों से श्रेष्ठ दिखा रहा,
कहीँ कोई जमीन,तो कहीं कोई जायदाद के लिए अपनों का रक्त बहा रहा ,
कहीं कोई प्रेम में आसक्त हो, अपनों का त्याग किये जा रहा ,
तो कहीं कोई बेटियों की इज्जत तार-तार किये जा रहा ,
ये कैसा अधर्म समाज में बढ़ता जा रहा ,
ये कैसा समाज है, जो ऐसे लोगों को बढ़ावा दिये जा रहा !!
