कहीं सूरत पे है पर्दा,
कहीं सीरत पे है पर्दा,
कहीं ज़ज्बात पे है पर्दा,
कहीं हालात पे है पर्दा,
कहीं हया का है पर्दा,
कहीं गुनाह पे है पर्दा,
इन सबसे ऊपर गर कोई है,
तो वो है किसी की अक्ल पे पर्दा!
कहीं सूरत पे है पर्दा,
कहीं सीरत पे है पर्दा,
कहीं ज़ज्बात पे है पर्दा,
कहीं हालात पे है पर्दा,
कहीं हया का है पर्दा,
कहीं गुनाह पे है पर्दा,
इन सबसे ऊपर गर कोई है,
तो वो है किसी की अक्ल पे पर्दा!