( दर्द )

अपनों से नजरें चुराया करते हैं,
दर्द दिल का छुपाया करते हैं,

अपनों के दिये जख्मों को तन्हाई में सिया करते हैं,
दर्द बढ़ जाता है दिल का, तो अश्कों को पिया करते हैं,

विश्वास ना उठ जाए अपनों से , यही सोच कर होठों को सिया करते हैं ||

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