वक्त का पहिया कितनी तेजी से चलता है,
जितनी तेजी से ऊपर ले जाता है,
उतनी तेजी से नीचे भी पटकता है,
इस गुरुर में मत रहना कि पैसे वाले का वक्त कहां बदलता है,
वक्त है जनाब, ये मालामाल को कंगाल और कंगाल को मालामाल करता है ||
वक्त का पहिया कितनी तेजी से चलता है,
जितनी तेजी से ऊपर ले जाता है,
उतनी तेजी से नीचे भी पटकता है,
इस गुरुर में मत रहना कि पैसे वाले का वक्त कहां बदलता है,
वक्त है जनाब, ये मालामाल को कंगाल और कंगाल को मालामाल करता है ||