( सुहाना बचपन )

आज याद आ रहा बचपन सुहाना,
मां की गोदी में लिपटकर सो जाना,
सिर पर उसका हाथ फिराना,
हर चिंता फिकर का उड़न-छू हो जाना,
लाड लड़ाकर हमें खाना खिलाना,
पापा को घोड़ा बनाना,
उनके संग घूमने जाना,
दिन-रात हमारे नखरें उठाना,
बहन-भाईयों संग मौज उड़ाना
लड़ना-झगड़ना फिर मिल जाना,
एक-दूजे बिन चैन ना पाना,
नाना-नानी के घर मौज उड़ाना,
बुआ-फूफा जी का छुट्टियों में घर आना,
सब बहन-भाईयों का इकट्ठे हो घर सिर पर उठाना,
उस इक पल में सारी जिंदगी जी जाना,
काश, लौट आए वो बचपन का जमाना

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started