( लकीरें )

लकीरें सच तो कहती हैं,
पर ये सब नहीं कहतीं,
मिलेगा उतना ही तुझको,
जितनी होगी तेरे कर्मो में शक्ति,
कर्मो से खुलेंगी राहें सफलता की,
कर्मो से ही बनेगी, बिगड़ेगी तेरी हस्ती,
अब तुझ पर ही है निर्भर, की कैसी हो तेरी नियती ||

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