( समय )

समय भी क्या हिसाब करता है,
हर किसी के कर्मो कि किताब रखता है,
मुखौटा ओढ़ने वालो के चेहरे बेनकाब करता है,
अच्छी नीयत वालों की राहों में फूल बेहिसाब रखता है,
समय तो, हीरे को खाक और खाक को ताज में सजाने का हुनर नायाब रखता है ||

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