( रक्षाबंधन की यादें )

नटखट भाई अल्हड़ बहना, काम एक-दूसरे से लड़ते रहना,
रूठें गर एक-दूजे से तो यही कहना, तू नहीं मेरा भैया और मैं नहीं तेरी बहना,


शरारत नई कोई सूझे तो फिर से आपस में मिल जाना,
कितना लड़े, कितना झगड़े, पर रक्षाबंधन पर प्रेम-भाव से भर जाना,

बहन का राखी – रोली, चावल से थाली सजाना,
भाई का थोड़ा इतराना, पर मन ही मन मुस्कुराना,

हर रक्षाबंधन पर बचपन की स्मृतियों का सजीव हो जाना,
और उन पलों को याद कर, मन का सदा हर्षोंउल्लास से भर जाना ||

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