( माँ – ममता का स्वरूप )

गोद में जिसकी सिर रखकर मैं सुकून पाता हूं,
वो मां ही है जिसके आंचल की छांव में मैं सारे दु:ख चिंताए भूल जाता हूं,

जिसके हाथ का खाकर मैं तृप्ती पाता हूं , वो मां ही है जिसके आगे मैं खाने में नखरे दिखाता हूं,

नखरे सारे मेरे वो हंसकर सिर पर उठाती है, वो मां ही है जो थकने पर भी मेरी फरमाइशें पूछती जाती है,

ऑंसू पोंछ मेरे, चेहरे पर मुस्कान लाती है, वो मां ही है जो जीवन जीने का हौंसला मुझमें भरती जाती है,

मेरी खुशी के लिए वो कुछ भी कर जाती है, कैसा भी हूं पर मुझे राजा बेटा ही बुलाती है,

ममता का स्वरूप है, भगवान का वो रूप है, मेरे मायने में, मां के साये में ये जीवन शीतल छाया और मां के बिना ये जीवन चिलचिलाती धूप है ||

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