चाहतों के समंदर में गोते लगाता हूं,
ख्यालों में तुझे अपने पास पाता हूं,
इज़हार मुहब्बत का तुझसे बेखौफ कर जाता हूं,
पर देख तेरी सहेलियों को साथ, ये ऑफर उनको भी चिपकाता हूं ,
खतरा किसके साथ उठाऊं विवाह का , ये समझ नहीं पाता हूं,
हालत, देख मित्रों की आजादी के फैसले को ही ठीक पाता हूं,
तन्हाइयों को ही अपना साथी बना ख्यालों से लौट आता हूं ||
