सिसकते दिल के फसाने बहुत हैं,
आंखों में हमारी आंसू लाने वाले बहुत हैं,
श्रेय दें किस-किसको हमारी बरबादी का ,
यहॉं हमारी बरबादी की दुआ करने वाले बहुत हैं,
रौंदते देखते हैं रोज अपने स्वाभिमान को इनके कदमों तले,
यहां हमारी पहचान पर सवाल खड़े करने वाले बहुत हैं,
बर्बाद करेंगे ये क्या खाक हमको, क्योंकि इनसे बचाने के लिए ढाल बनकर खड़े होने वाले मेरे यार बहुत हैं ||
