तेरे जिस्म से ही मैंने ये जिस्म पाया है,
तेरी कोख में ही मेरे अस्तित्व ने आकार पाया है,
नौ महीने कोख में अपनी तूने मेरा भार उठाया है,
मुझे मुस्कुराते देख तूने अपना हर दर्द भुलाया है,
ना जाने मां ऊपर वाले ने तुझे किस मिट्टी से बनाया है,
तेरे आंचल में, तेरी गोद में ऐसा कौन सा जादू छुपाया है,
कितना भी बेचैन हो मन तेरी गोद मां हर पल सुकून ही पाया है ||
