( दूरियाँ )

दूरियाँ चंद दिनों की क्या काम कर गई,
अनदेखा करते थे कल तक जो हमें,आज उनके दिल में हमें देखने की चाह बढ़ गई,
फिक्र हमारी आज उन्हें हमारी चौखट पर खड़ा कर गई,
लफ्जों की जरूरत न हुई क्योंकि नजरें उनकी, इश्क का इजहार खुलेआम कर गई,
कौन कहता है, की इश्क में दूरियाँ अच्छी नहीं होती
अजी, हमारे लिए तो दूरियाँ ही हमारे दर्द की दवा बन गई ||

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