ये कैसे झूठे रिश्ते हैं, ये कैसे झूठे नाते हैं,
अपने ही अपनों का दिल दुखाते हैं,
और इतने पर भी ये संतुष्टि नहीं पाते हैं,
अपने अहं को हथियार बना, अपनों के जज्बातों से खेलते जाते हैं,
वक्त के साथ फिर ये पलटी खाते हैं,
और खुद को कठपुतली बता, ईश्वर पर ही दोष लगाते हैं ||
