( मॉं से रोशन है दुनिया )

रोशन है दुनिया मेरी अपनों की दुआओं से,

पर, मुकाबला कर नहीं सकता कोई माँ की दुआओं से,

सिवाय, मेरी खुशियों के वो कुछ ना मांगती रब से,

जीवन लुटा देती अपना,पर समझौता करती नहीं मेरी मुस्कुराहट से,

उसकी तो सुबह भी मुझसे, उसकी शाम भी मुझसे,

घबरा जाती गर, हो जाऊं एक पल भी ओझल उसकी नजरों से,

मन्नतें माँगती मेरी वो इस दुनियां के मालिक से,

रब भी खड़ा हो जाता है मां के एक आदेश से,

क्योंकि रोक़ नहीं पाता वो खुद को, माँ के निस्वार्थ प्रेम की धारा में बहने से ।।

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