माना, आज कुचलते हैं वो, हमारे अरमानों को,
पर कब तक रोक पायेंगे, हमारी उड़ानों को,
उड़ान ऊंचाइयों को छूने की,
उड़ान कुछ कर गुजरने की,
उड़ान सितारों सा चमकने की,
उड़ान अपनों के लिए कुछ कर गुजरने की,
एक उड़ान भरनी है, अपने सपनों के आसमां को छूने की ||
माना, आज कुचलते हैं वो, हमारे अरमानों को,
पर कब तक रोक पायेंगे, हमारी उड़ानों को,
उड़ान ऊंचाइयों को छूने की,
उड़ान कुछ कर गुजरने की,
उड़ान सितारों सा चमकने की,
उड़ान अपनों के लिए कुछ कर गुजरने की,
एक उड़ान भरनी है, अपने सपनों के आसमां को छूने की ||