(हमारे हौंसले)

अपनों के दिये जख्म, पल-पल रिसते रहते हैं,
हम तन्हाइयों में हौंसलों का मलहम उन पर घिसते रहते हैं,
वो सोचते हैं हमें दर्द नहीं होता,
क्योंकि, हम मुस्कान को अपने चेहरे पर हम कुछ इस तरह से उकेरा करते हैं,
और पल-पल अपनें आस-पास खुशियों के फूल बिखेरा करते हैं ,
क्या, खाक तोड़ेंगे ये हमारे हौंसले,
क्योंकि ,अपनी एक मुस्कान से ही हम,
इनके नापाक इरादों को ढेर किया करते हैं||

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