( माँ – ममता का स्वरूप )

गोद में जिसकी सिर रखकर मैं सुकून पाता हूं,
वो मां ही है जिसके आंचल की छांव में मैं सारे दु:ख चिंताए भूल जाता हूं,

जिसके हाथ का खाकर मैं तृप्ती पाता हूं , वो मां ही है जिसके आगे मैं खाने में नखरे दिखाता हूं,

नखरे सारे मेरे वो हंसकर सिर पर उठाती है, वो मां ही है जो थकने पर भी मेरी फरमाइशें पूछती जाती है,

ऑंसू पोंछ मेरे, चेहरे पर मुस्कान लाती है, वो मां ही है जो जीवन जीने का हौंसला मुझमें भरती जाती है,

मेरी खुशी के लिए वो कुछ भी कर जाती है, कैसा भी हूं पर मुझे राजा बेटा ही बुलाती है,

ममता का स्वरूप है, भगवान का वो रूप है, मेरे मायने में, मां के साये में ये जीवन शीतल छाया और मां के बिना ये जीवन चिलचिलाती धूप है ||

जानती हूं तेरे आगे किसी की नहीं चलती,

तू चाहे तो पल में बना दे, तू चाहे तो पल में मिटा देगा मेरी हस्ती,

तू चाहे तो डूबा दे, तू चाहे तो पार लगा दे मझधार में फंसी हर कश्ती ||

( अपनों का दर्द )

अपनों का दर्द हमें बहुत तड़पाता है,
देख तकलीफें उनकी, हौंसला टूट ही जाता है,
दर्द से कराहना उनका, दिल हमारा चीर जाता है,
जब भी उनका मुस्कुराता चेहरा नजरों के सामने आता है,
उम्र मेरी लग जाए, उनके लिए यही दुआ दिल मांगता जाता है ||

( इम्तिहान )

ना टूटना है, ना बिखरना है,

थाम डोर हौंसलों की हमें तो बढ़ते रहना है,

जिंदगी के हर इम्तिहान में अब हमको खरा उतरना है,

इन इम्तिहानों से गुजर कर ही हमारा व्यक्तित्व निखरना है,

जिंदगी के समंदर में इन तूफानी लहरों से अब लड़कर पार उतरना है,

जीत भी होगी कदमों में तेरे, बस हौंसलों को मजबूत करना है ||

( मेरी प्रीत )

किन लफ्जों में बयां करूं अपने दिल की प्रीत,

कैसे कहूं तुमसे बन जाओ मेरे मीत,

तुम्हीं मेरे जीवन का सुरमयी संगीत,

संग तुम्हारे वक्त जाने कैसे जाता है बीत,

साथ तुम्हारे गुनगुनाएंगे हम प्यार भरे गीत,

थाम लो गर हाथ मेरा, तो मुकम्मल हो जाए मेरी प्रीत ||

( रक्षाबंधन की यादें )

नटखट भाई अल्हड़ बहना, काम एक-दूसरे से लड़ते रहना,
रूठें गर एक-दूजे से तो यही कहना, तू नहीं मेरा भैया और मैं नहीं तेरी बहना,


शरारत नई कोई सूझे तो फिर से आपस में मिल जाना,
कितना लड़े, कितना झगड़े, पर रक्षाबंधन पर प्रेम-भाव से भर जाना,

बहन का राखी – रोली, चावल से थाली सजाना,
भाई का थोड़ा इतराना, पर मन ही मन मुस्कुराना,

हर रक्षाबंधन पर बचपन की स्मृतियों का सजीव हो जाना,
और उन पलों को याद कर, मन का सदा हर्षोंउल्लास से भर जाना ||

( समय )

समय भी क्या हिसाब करता है,
हर किसी के कर्मो कि किताब रखता है,
मुखौटा ओढ़ने वालो के चेहरे बेनकाब करता है,
अच्छी नीयत वालों की राहों में फूल बेहिसाब रखता है,
समय तो, हीरे को खाक और खाक को ताज में सजाने का हुनर नायाब रखता है ||

( बेवजह मेहरबॉं)

थम जाता है मेरी सासों का कारवां,
जब भी होती हो तुम मुझ पे बेवजह मेहरबॉं ,
कांप जाता है भय से मेरे जिस्म का रूंआ-रूआं,
पूछता है, मुझसे अब क्या गुनाह तुझसे हुआ,
आखिर क्यों इस दहकती ज्वाला ने, शांत ज्योती का रूप है धारण किया,
तभी बेतुके ख्यालों को अनसुना कर, जाकर उसके आगे आत्मसमर्पण किया,
पूछा उससे बढ़े प्यार से, प्रिय क्या मेरे किसी कार्ये से तुम्हारा दिल है आहत हुआ,
वह मुस्कुराते हुए बोली, नहीं आज व्रत के कारण तुम्हें यह सम्मान प्राप्त है हुआ,
आज मैं सेवा कर रहीं हूं तुम्हारी, कल तुम्हे देखूंगी मेरी सेवा करता हुआ ||

( राहें उन्नति की )

राहें उन्नति की आसान नहीं होती,

पकी-पकाई तो मां ही देती है, किस्मत नहीं देती,

माना मेहनत करने वालों की राहें आसान नहीं होती,

पर बिना श्रम पाने वालों की कद्र भी नहीं होती,

मेहनत करने वाले ही पाते हैं , सब जिंदगी में,

क्योंकि वक्त के थपेड़ों की भी, इनके आगे नहीं चलती ||

( प्रभू प्राप्ति अंतर्मन से )

ढूंढ रहा मुझको पगले ,मंदिरों और मसानों में,

काश! ढूंढा होता तूने अंतर्मन के तहखानों में,

चढ़ावा ऐसे चढ़ाता, जैसे खरीदारी करता हो दुकानों में,

उलझा रहा हमेशा तू, समाज के दिखावटी तानों-बानों में,

सुख ही चाहा हमेशा तूने, पर मिलता वही जो है किस्मत के खानों में,

दिन-रात चक्कर लगाता तू, गुरुओं की दुकानों में,

काश! उंगली थमायी होती ये कहकर, मदद करो जिंदगी का भवसागर पार कराने में,

मैं तो तेरे अंदर पगले, झांक ज़रा अंतर्मन के तहखानों में ||

( कलेजे का टुकड़ा )

मां की प्यारी रानी बेटी, पापा की हूं जान,


दादा-दादी की लाडली, भाई की पार्टनर शैतान,


नाना-नानी की परी और इन सबके चेहरों की मुस्कान,


सुख-दु:ख की साथी और खुशियों की हूं खान,


मुझसे ही रौनक घर में, मेरे बिन सब वीरान ||

( चाहत )

तस्वीर तेरी इस दिल में उतारी है,
कुछ और नहीं हमदम ये चाहत की खुमारी है,
मदहोशी सी छायी है जब से तेरी सूरत ये निहारी है,
तुझे देखकर लगता है, तू तकदीर हमारी है,
साथ मिल जाए गर तेरा तो दुनिया हमारी है,
गर मिला ना तू हमको तो जिंदगी अंधियारी है,
तेरे बिन हमदम सांस लेना भी भारी है,
तू इश्क नहीं मेरा तू पूजा हमारी है ||

( भयावह स्वप्न )

तूफानी हवाओं का ज़ोर ,
ऊपर से रात्रि का सन्नाटा अति घनघोर ,

सूखे पत्तों की चरमराहट से दिल में दहशत का ज़ोर ,

हर छोर से आता भयावह आवाजों का शोर , ऐसे में एक साया आता दिखा अपनी ओर ,

धड़कने तेज होने लगी दिल की, जैसे-जैसे वो बढ़ता मेरी ओर ,

कंपकपाती आवाज़ से चिल्लाते हुए जब आस-पास नजरें दौड़ाई ,सूनी थी राहें और सूना हर मोड़ ,

लड़खड़ाते, कदमों से जैसे ही बचने को दौड़ लगाई ,

उस साये को सामने देख डर से आवाज ही निकल नहीं पाई,

तभी किसी ने मुझे जोर से थपथपाया,

चिल्लाकर जैसे ही उठा वह भयावह स्वप्न था, ये सोचकर शुक्र मनाया ||

( लकीरें )

लकीरें सच तो कहती हैं,
पर ये सब नहीं कहतीं,
मिलेगा उतना ही तुझको,
जितनी होगी तेरे कर्मो में शक्ति,
कर्मो से खुलेंगी राहें सफलता की,
कर्मो से ही बनेगी, बिगड़ेगी तेरी हस्ती,
अब तुझ पर ही है निर्भर, की कैसी हो तेरी नियती ||

( सुहाना बचपन )

आज याद आ रहा बचपन सुहाना,
मां की गोदी में लिपटकर सो जाना,
सिर पर उसका हाथ फिराना,
हर चिंता फिकर का उड़न-छू हो जाना,
लाड लड़ाकर हमें खाना खिलाना,
पापा को घोड़ा बनाना,
उनके संग घूमने जाना,
दिन-रात हमारे नखरें उठाना,
बहन-भाईयों संग मौज उड़ाना
लड़ना-झगड़ना फिर मिल जाना,
एक-दूजे बिन चैन ना पाना,
नाना-नानी के घर मौज उड़ाना,
बुआ-फूफा जी का छुट्टियों में घर आना,
सब बहन-भाईयों का इकट्ठे हो घर सिर पर उठाना,
उस इक पल में सारी जिंदगी जी जाना,
काश, लौट आए वो बचपन का जमाना

( साज़िशें )

बर्बादी का मेरी फसाना लिखते हैं, ये कैसे अपने हैं जो मेरी बर्बादी पर हंसते है,

जज्बातों से मेरे रोज खिलवाड़ करते हैं, दुश्मनों से हाथ मिला मेरी बर्बादी की साजिशें रचते हैं,


खंजर घोंप कर पीठ में, किसने किया ये मासूमियत से सवाल करते हैं,

वार करना है तो सीने पर करो, पीठ पर तो डरपोक वार करते है,

शेर तो सामने से वार करता है, छिपकर तो भेड़िये शिकार करते हैं ||

( मेरे पापा )

मेरे पापा है मेरी पहचान, दिल की लेते सब बातें जान,

मेरी छोटी सी चोट पर भी हो जाते बड़े परेशान,

अपनी ख्वाहिशों से हो अंजान, पूरे करते मेरे सब अरमान,

मेरे अरमानों की खातिर, ना देते अपनी सेहत पर ध्यान,

सहीगलत का मुझको देते ज्ञान,

ताकि बचपने में ना करूं मैं अपना कोई नुकसान,

मस्ती कर हमारे संग, अपनें अंदर के बच्चे का देते प्रमाण,

मेरे लिए बड़ेबड़े सपने सजाते, फिर उन सपनों को देते उड़ान,

कितना भी रूठें हो मुझसे, मनाने पर मेरे फौरन जाते मान,

मेरा भी अब यही ख्वाब है, पूरे करूं उनके सब अरमान,

बुढ़ापे में उनका बनूं सहारा, जिस पर हो उनको अभिमान,

बापबेटे की आदर्श जोड़ी का, दुनिया को हम दें प्रमाण ||

( वक्त )

वक्त का पहिया कितनी तेजी से चलता है,

जितनी तेजी से ऊपर ले जाता है,
उतनी तेजी से नीचे भी पटकता है,

इस गुरुर में मत रहना कि पैसे वाले का वक्त कहां बदलता है,

वक्त है जनाब, ये मालामाल को कंगाल और कंगाल को मालामाल करता है ||

( आहें )

सिसकता दिल तुझे पुकारता रहा,
कर हमारी आहों को अनसुना, तू गैरों संग वक्त गुजारता रहा,

मोल हमारी मुहब्बत का तू कौड़ियों में आंकता रहा,
शिद्दत देख हमारी चाहत की, दीवाना दिल फिर भी तुझे चाहता रहा,

गैरों संग ही सही, खुश रहे तू सदा यही दिल मांगता रहा ||

( कर्मो का फल )

किसी का घर जलाओगे, तो घर तुम्हारा भी जलेगा,
देर से ही सही कर्मो का फल तुमको भी मिलेगा,

किसी की सिसकती आंहों से घर तेरा भी हिलेगा,
किसी बेगुनाह के आंसुओं में घर तेरा भी ढहेगा,

तू क्या किसी को बरबाद करेगा,
वो अपनी पर आया तो तुझे ही खाक करेगा ||

( दर्द )

अपनों से नजरें चुराया करते हैं,
दर्द दिल का छुपाया करते हैं,

अपनों के दिये जख्मों को तन्हाई में सिया करते हैं,
दर्द बढ़ जाता है दिल का, तो अश्कों को पिया करते हैं,

विश्वास ना उठ जाए अपनों से , यही सोच कर होठों को सिया करते हैं ||

( ख्वाब )

ख्वाब आंखों में तो हर किसी ने सजाये हैं,
पर सबके ख्वाब मुकम्मल कहां हो पाये हैं,

किसी के ख्वाबों को साथ मिला किस्मत का,
तो किसी के ख्वाब हालातों की चोट खाये हैं,

किस्मत का साथ पाकर तो कोई भी जीत जाये,
पर जीत तो उन्हीं की है जो ठोकरें खाकर भी, अपनें ख्वाब पूरे कर पाये हैं ||

( रब / भगवान )

जिंदगी के हर रंग से वाक़िफ़ करवा रहा है रब,

गुरु बन हमारी कमज़ोरियों से हमें मिलवा रहा है रब ।

डर ना जाएँ कहीं ज़िंदगी की राहों में हम,

तभी साथी बन साथ-साथ चल रहा है रब

सुख-दुख का चक्र चला रहा है रब,

धैर्य शक्ति को हमारी आज़मा रहा है रब

पार कर सके हर पढ़ाव को हँसते -हँसते हम,

तभी एक-दूसरे की ताक़त हमें बना रहा है रब ।।

( फूलों से सीख )

फूलों से सीख लो, सदा खिलखिलाने की,
कांटों संग, रहकर भी मुस्कुराने की,

अपनी खुश्बू से सबकी, जिंदगी महकाने की,
डाली से टूटकर भी, सबके घरों की सुंदरता बढ़ाने की,

तूफानों को हंसते-हंसते पार करने की
अंत में, प्रभु के श्रृंगार की, शोभा बढ़ाने की,

( संस्कार )

संस्कारों का बीज, बच्चों में हमने ही बोना है,
रोपाई ढंग से ना हुई तो, उम्रभर का रोना है,

बच्चों में आपके धन का नहीं, संस्कारों का आंकलन होना है, प्रतिबिम्ब है आपके, आपकी सोच ने उनके व्यवहारों से ही प्रदर्शित होना है,

सपनें जगाएगें जो, उनकी आंखों में बड़े-बड़े ,
उन सपनों की बली, एक दिन हमनें ही होना है,

उपहार ना दिये तो, बच्चों ने पलभर ही रोना है,
संस्कार दिये तो, उनका भविष्य उज्जवल ही होना है,

( ख्वाहिशें )

ख्वाहिशों के समंदर में डुबकी लगाएंगे,
अब तैरना सीखेंगे या डूब जाएंगे,

कोशिशों पर अपनी ना विराम लगाएंगे,
आज नहीं तो कल तैरना सीख ही जाएंगे,

बस ख्वाहिशें अपनी गर सीमित कर पाएंगे,
तभी ख्वाहिशों के समंदर में सुख की डुबकी लगा आनंद पाएंगे,

नहीं तो ख्वाहिशों के अथाह समंदर में हम कहीं खो जाएंगें,
पूरी करते-करते ख्वाहिशें हम ही एक दिन पूरे (खत्म) हो जाएंगे ||

( दिल का सौदा )

तुम संग दिल लगा अपना सब कुछ गवां बैठे,
सब कुछ हारकर भी जीतने वालों में नाम लिखवा बैठे,

दिल के सौदे में इतना मुनाफा कमा बैठे,
बिना बदनाम हुए भी नाम कमा बैठे,

कुछ भी पाने की ख्वाहिश ना रही बाकी,
जब से तुमको अपना बना बैठे ||

( शहीद का आखिरी संदेश )

कितने ही आंसू बहे होंगे तेरी आंखों से,
जब तूने मेरी तस्वीर को निहारा होगा,

कितने ही दर्द से गुजरा होगा तेरा दिल,
जब सिसकते हुए तेरे लबों ने मेरा नाम पुकारा होगा,

कितने ही सपनें टूटे होंगें तेरी आंखों के, जब तिरंगे में
लिपटा मुझे देखा होगा,

गर्व से सिर ऊंचा तो किया होगा तूने, जब वतन पर मेरे शहीद होने का संदेशा तुझे सुनाया होगा,

चेहरे पर तेरे गर्व और आंखों में नमी होगी, जब पूरे देश ने मेरी अन्तिम यात्रा को अपनी दुआओं के फूलों से सजाया होगा!

( नाम के रिश्ते )

अच्छे स्वभाव की परिभाषा क्या है ये सोच रहे हैं हम,

मीठा बोलने वालों से आजकल डर रहे हैं हम,

कड़वे है स्वभाव के ये सुन रहे हैं हम,

पर इन मीठे स्वभाव वालों से एक सवाल कर रहे हैं हम,

ऐसा क्या ग़लत काम कर रहे हैं हम,

क्या अपनों को ग़लतियां करने से रोकने का पाप कर रहे हैं हम ,

औरों की तरह उतेजित अपशब्दों का प्रयोग नहीं कर रहे हैं हम,

ना ही किसी के मान-सम्मान को पैरों तले रौंदते है हम ,

परन्तु अपने मान सम्मान को इनके पैरों तले रौंदते देख रहे हैं हम,

फिर भी अपने आँसुओं को छुपा, इनको खुश करने की कोशिशें कर रहे हैं हम ।

( समय )

समय अत्यंत शक्तिमान है,
निरंतर ही गतिमान है,

जो करते इसका सम्मान है,
संसार में वही बनाते अपनी पहचान है,

जो ना देते इसे सम्मान है,
समय के चक्र में हो जाते गुमनाम है,

समय अपनी कसौटी पर परखता हर इंसान है,

जो उतरे खरे इस कसौटी पर, वही समाज में पाते विशिष्ट सम्मान हैं ।

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