झूठ ही बिकता है आज बाजारों में, झूठ ही है रिश्तों में,
झूठ ही व्यवहारों में, हर कोई मुखौटे लगा घूम रहा झूठ के गलियारों में,
इच्छापूर्ती के लिए गलत राह अपनाकर, अब शांति ढूंढे मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों में!
झूठ ही बिकता है आज बाजारों में, झूठ ही है रिश्तों में,
झूठ ही व्यवहारों में, हर कोई मुखौटे लगा घूम रहा झूठ के गलियारों में,
इच्छापूर्ती के लिए गलत राह अपनाकर, अब शांति ढूंढे मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों में!