पत्नी पति से पूछती है-ऐसा क्या तुम मेरे लिए करते आ रहे हो, जब से हुई है शादी, बस ताने और फबतियाँ ही कसते जा रहे हो।
पति बोला तुम्हें ख़ुश करने के लिए, कितने पापड़ बेलता जा रहा
बेख़ौफ़-बेधड़क से, सहनशक्ति की मूर्ती में परिवर्तित होता जा रहा हूँ
सिर्फ़ तुम्हारे लिए ही , तुम्हारे मायके वालों को सहन करता जा रहा हूँ ,
बारूद दिया है तुम्हारे पिता ने, फिर भी अपना क़ीमती हीरा दिया है यही बता रहा हूँ ।
कैसी भी दुश्मनी निभाई हो , फिर भी उनके आगे नत्मस्तक होता आ रहा हूँ ,
कैसा भी हो तुम्हारे साथ जीवन प्रिय, सभी को अच्छे करमों का फल ही बता रहा हूँ ।।
