( कलम )

उठाई कलम हाथों में तो हाथ खुद ब खुद लिखते चले गए,


आंसू लफ्जों का रूप ले हाल दिल का बयां करते चले गए,


दिल की गहराईयों में छिपा दर्द हम पन्नों पर उतारते चले गए,


स्याही भी धुंधली हो गई जैसे-जैसे हम यादों की गहराई में उतरते चले गए ||

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