( ख्वाहिशें )

ख्वाहिशों के समंदर में डुबकी लगाएंगे,
अब तैरना सीखेंगे या डूब जाएंगे,

कोशिशों पर अपनी ना विराम लगाएंगे,
आज नहीं तो कल तैरना सीख ही जाएंगे,

बस ख्वाहिशें अपनी गर सीमित कर पाएंगे,
तभी ख्वाहिशों के समंदर में सुख की डुबकी लगा आनंद पाएंगे,

नहीं तो ख्वाहिशों के अथाह समंदर में हम कहीं खो जाएंगें,
पूरी करते-करते ख्वाहिशें हम ही एक दिन पूरे (खत्म) हो जाएंगे ||

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