प्यार भरा दिल लेकर उतरे थे रिश्तों के बाज़ार में,
पता नहीं था खो बैठेंगे अपना सब कुछ, दिल के इस व्यापार में,
बड़े–बड़े सौदे होते देखे दिल के, फँस कर जज़्बातों के जाल में,
हर किसी का कुछ ना कुछ गिरवी था, इस प्यार के बाज़ार में,
कहीं जज़्बात थे गिरवी,कहीं हालात थे गिरवी,
कहीं मान–सम्मान था गिरवी,कहीं स्वाभिमान था गिरवी,
कहीं सपनें थे गिरवी ,कहीं किसी के अपने थे गिरवी,
अब पाया कि बिना गिरवी रखे कुछ भी, हासिल नहीं होता इस बाज़ार में
बिना सौदे के तो यहाँ,कोई रिश्ता भी नहीं टिकता इस बाज़ार में,
अब निकल पड़े हैं वापिस,देख हालात इस रिश्तों के बाज़ार से ,
करके ये संकल्प ना उतरेंगे करने व्यापार इस दिल का,इस रिश्तों के बाज़ार में।।
