कतरे-कतरे में उनके बेवफाई समाई थी,
पर हम पर तो इश्क की खुमारी छाई थी,
जिनकी मुहब्बत में हमने दुनिया बिसराई थी,
हर खुशी दुनियां की जिनकी राहों में सजाई थी,
दु:ख तो यही है कि,
हमारी बरबादी की साज़िश उन्होंनें ही रचाई थी,
जिनकी खुश्बू हमनें अपनी सांसों में बसाई थी
