उठाई कलम हाथों में तो हाथ खुद ब खुद लिखते चले गए, आंसू लफ्जों का रूप ले हाल दिल का बयां करते चले गए, दिल की गहराईयों में छिपा दर्द हम पन्नों पर उतारते चले गए, स्याही भी धुंधली हो गई जैसे-जैसे हम यादों की गहराई में उतरते चले गए ||
Author Archives: Shwetabhardwaj
( खाली पन्ने )
बड़े-बड़े ख्वाब दिल देखता रहा,पूरा करने को उन्हें मैं रात-रात भर जागता रहा, अनदेखा कर अपनों को मैं दिन-रात जिंदगी की दौड़ में बस भागता रहा, मेरे अपनों ने तो बस मुझसे वक्त और प्यार मांगा था, और मैं उन्हें अकेलेपन का उपहार देता रहा, आज जाना की अपनों संग बनाई यादें ही है बैसाखीContinue reading “( खाली पन्ने )”
( सच्चा इंसान )
सच्चा इंसान किसी से भी डरता नहीं, तकलीफ़ों के डर से झुका करता नहीं, लोगों की साज़िशों की परवाह करता नहीं, जिसका साथी खुदा हो किसी के रोके रूका करता नहीं ।।
( ज़िंदादिल )
ज़िंदादिल है जिंदगी को ज़िंदादिली से जीया करते हैं, समाज की परवाह हम किया नहीं करते हैं । खुदा की दी, इस ख़ूबसूरत जिंदगी को रो-रोकर बरबाद नहीं करते है, अपने होंठों पर मुस्कान रखकर लोगों को हर पल को मुस्कुराकर जीने की सीख दिया करते है। हर पल मुस्कुराने वालों का इम्तिहान तो खुदाContinue reading “( ज़िंदादिल )”
( पर्दा )
कहीं सूरत पे है पर्दा, कहीं सीरत पे है पर्दा, कहीं ज़ज्बात पे है पर्दा, कहीं हालात पे है पर्दा, कहीं हया का है पर्दा, कहीं गुनाह पे है पर्दा, इन सबसे ऊपर गर कोई है, तो वो है किसी की अक्ल पे पर्दा!
( अधर्मी समाज )
आज घर घर में ये कैसी महाभारत छिडी़ है , अपनों के ही बीच ये कैसी होड़ लगी है, हर कोई अपने को अपनों से श्रेष्ठ दिखा रहा, कहीँ कोई जमीन,तो कहीं कोई जायदाद के लिए अपनों का रक्त बहा रहा , कहीं कोई प्रेम में आसक्त हो, अपनों का त्याग किये जा रहा ,Continue reading “( अधर्मी समाज )”
( रहमत )
खुदा की रहमत हुई तो आँखों से हर धूल छँट गई, ख़ून के रिश्तों की सच्चाई दिख गई , दिल के रिश्तों की गहराई दिख गई , जिनके लिए करते-करते ये जिंदगी घिस गई, आज उनकी नज़रों में हमें हमारी औक़ात दिख गई ।
( आईना )
आईने में दिखता अक्स शायद किसी और का था,जिसे मैं जानती थी वो शख्स कोई और ही था, इस अक्स के तो न जाने चेहरे कितने थे,इन चेहरों के पीछे राज़ गहरे कितने थे, इन राज़ों को दिल में छिपा स्वार्थ साधे कितने थे,न जाने इन मुखौटों के शिकार हुए कितने ही अपने थे, लगताContinue reading “( आईना )”
( इच्छाओं की दौड़ )
रोक लिया होता गर,पल-पल बढ़ती अपने बच्चों की इच्छाओं की दौड़ को, तो आज अग्नि ना देते उनकी चिताओं को, जीत के साथ सिखाते, गले लगाना हार को,तो पैसा, परीक्षा, प्यार, में स्वीकार करते हार को, अकेलापन जिंदगी में हमने ही दिया उनको,काश! इस तेज़ भागती जिंदगी में समय दिया होता उनको, कभी कंधे परContinue reading “( इच्छाओं की दौड़ )”
( झूठे रिश्ते )
झूठे रिश्तों की ये कैसी दलदल है, दम घुट रहा जिसमें हमारा हर पल है। रिश्तों में उठी ये कैसी हलचल है, हर अपना झूठ से लिपा, दिखता आजकल है। किस पर विश्वास करें ये दुविधा प्रतिपल है, झूठे लोगों से आकर्षित हर कोइ आजकल हैं। सच्चे लोगों का, प्रताड़ना से भरा हर पल है।
( सुनहरे पल )
थाम तुम्हारी बाहें जब इस घर में मैं आई,रंग–बिरंगे सपनों से थी आंखें जगमगाई । अपने प्यार के रंगों से तुमने मेरी दुनियाँ सजाई,जिंदगी की इन कंटीली राहों पर चोटें भी खाई । और उन चोटों पर तुमने अपने प्यार की दवा थी लगाई,फिर निकाल कांटे सारे, मेरी राहें फूलों से सजाई । कुछ सपनेंContinue reading “( सुनहरे पल )”
( दोस्ती )
दोस्ती का रिश्ता खास होता है,हर दोस्त दिल के पास होता है,ये एक ऐसा एहसास होता है,जिसमें एक-दूसरे पर विश्वास होता है,दोस्त के राज़ छिपाने का इसमें पूरा प्रयास होता है,चेहरे पर उसके मुस्कुराहट देख मन खुश, और आंसू देख मन उदास होता है,दोस्त के लिए हर किसी से लड़ जाने का साहस बेहिसाब होताContinue reading “( दोस्ती )”
( बेटियॉं )
मां की प्यारी बेटियां, पापा की दुलारी बेटियां,परिवार का मान बेटियां, पापा की जान बेटियां, घर को अपनी किलकारीयों से भरती बेटीयां,अपने प्यार की खुश्बू से बाबुल का घर महकाती बेटियां, मां-बाप के दु:ख में सबसे पहले आंखे भिगोती बेटियां, मां-बाप के कलेजे का गर टुकड़ा होती हैं बेटियां, फिर क्यों शादी के बाद पराईContinue reading “( बेटियॉं )”
( बचपन सब से प्यारा )
बचपन सब से प्यारा होता है, उसमें मन बिल्कुल साफ़ होता है। अपनों से ही रूठना मनाना होता है, फिर कुछ ही पलों में उनके साथ नाचना गाना होता है। लोग क्यों कहते हैं कि बचपन मुड़कर नहीं आता, क्योंकि बड़े होकर हमें अपना अहं बहुत प्यारा होता है। बचपन जैसी जिंदगी चाहिए , तोContinue reading “( बचपन सब से प्यारा )”
( ज़िन्दगी )
ज़िन्दगी भी कैसे–कैसे रंग दिखाती है,एक पल सुख, तो दूसरे ही पल दु:ख से रुबरु कराती है, सुख का पहिया इतनी तेज़ी से घुमाती है,कि खुशियां सुहाने स्वप्न की तरह पल में ओझल हो जाती हैं! दु:ख का पहिया इतनी धीमी गति से चलाती है, कि हर पल, हर घड़ी में पूरी ज़िन्दगी का सारContinue reading “( ज़िन्दगी )”
( इम्तिहान )
क्या पता था कि अपनो के हाथों मात खांएगें, जिनकी राहें फूलों से सजाई हमने, वो ही हमारे लिए काँटे बिछाएँगे। काँटे बिछाने वाले भी अब झटका खाएँगे , जब काँटों में भी हमें मुस्कुराता पाएँगे । अपनी हर मुस्कुराहट से खुदा को भी ये बताएँगे, कितने भी ले लो इम्तिहान,आपकी हर परीक्षा में हमContinue reading “( इम्तिहान )”
( शहीदों को सलाम )
रोना नहीं है हमको, अब उनको रुलाना है जान ली जिसने हमारे जवानों की, उस चीन को , उसकी असली औकात दिखाना है, डर जाए सपनें में भी, गर देखे हमारे जवानों को , इस कदर यारों उसका सुख-चैन उड़ाना है , शहादत को जवानों की बेकार ना करना है, काटकर सिर दुश्मन का शहीदोंContinue reading “( शहीदों को सलाम )”
( हमारी पहचान- पिता )
माँ अगर धरती है , तो आसमान है पिता । हमारे अस्तित्व की पहचान है पिता । माँ से अगर यह देह है तो इसमें बहता रक्त है पिता ।हमारे अस्तित्व की पहचान है पिता । उँगली पकड़कर चलना सिखाता है पिता ।गिर जाएँ जिंदगी की दौड़ में तो उत्साह बढ़ा कर उठाता है पिताContinue reading “( हमारी पहचान- पिता )”
( कंगन की ज़िद )
आज घर पहुंचकर देखा,पत्नी ने मेरी मेनका सा रुप रचाया है,तब समझते मुझे ये देर ना लगी, कुछ खरीदने के लिए ही इसने ये जाल बिछाया है! तभी उसके हाथों में एक कंगन नजर आया है, तब समझा की किसने इसका मन भटकाया है और क्यों इसने मुझे रिझाने को ये मेनका सा रूप रचायाContinue reading “( कंगन की ज़िद )”
( फ़रेब )
हमारे अपनों ने ही हमारा दिल दुखाया है, जिनसे उम्मीद थी सहारे की, उन्हीं से ज़ख़्म पाया है। सभी ने स्वाँग रचने वालों के झूठे आँसुओं को पोंछने के लिए हाथ बढ़ाया है, और हमारे आँसुओं को देखने के लिए नज़रों को भी नहीं उठाया है । इनके इस व्यवहार ने हमें इतना समझाया है,Continue reading “( फ़रेब )”
( एक नन्हा फ़रिश्ता )
एक नन्हा फ़रिश्ता आया है, अपनी मासूम शरारतों से उसने उत्पात मचाया है । ख़ुद तो शरारत करता है , मुझे भी शरारती बनाया है । बोलना देर से सीखा मगर, उस छोटी उम्र में ही गेम्स में हाथ जमाया है । कुछ देर ना देखे मुझे तो, सारा घर सर पर उठता है ,अपनेContinue reading “( एक नन्हा फ़रिश्ता )”
( ज़ख़्मी दिल )
ज़ख़्मी दिल चीख़-चीख़ कर करता रहा पुकार , देखने हमें न कोई आया एक बार । जिनके ज़ख़्मों पर हमनें मरहम लगाया हर बार, अनदेखा कर हमारे ज़ख़्मों को वो हो गए फ़रार । हमनें भी अब क़सम यही खाई है यार , ना कहेंगे इन रिश्तों को अपना, ना करेंगे इनसे प्यार। ख़ुशियों केContinue reading “( ज़ख़्मी दिल )”
( हँसने से ही है जिंदगी )
सोचते थे कि मुस्कुराकर जीना ही है जिंदगी, पर मुस्कुराने पर ही एतराज़ करते है सभी । खुद कि हँसी को तो नज़र ना लगे कभी ,पर दूसरों की हँसी को नज़र लगाते हैं सभी । ख़ुद तो मर-मर कर जीते है लोग,दूसरों से भी यही उम्मीद करते है लोग । खाई हो मुस्कुराकर जीनेContinue reading “( हँसने से ही है जिंदगी )”
( करोना – हल्के में लो ना )
ये कैसी बिमारी है आई,जिसने सारी दुनिया है हिलाई ! इसे मामूली समझने की सबने कितनी बड़ी कीमत है चुकाई ! किसी पिता, किसी माता, किसी भाई, किसी बहन ने जान है गंवाई ! मौतौं का सिलसिला तब तक नहीं थमेगा भाई, जब तक दिखाओगे यूं ही लापरवाही, थोड़ी सी सावधानी अपनाकर यदि जा सकतीContinue reading “( करोना – हल्के में लो ना )”
( एक नन्ही परी )
एक नन्ही परी मेरी जिंदगी में आई,आगमन ने उसके मेरे दिल में हलचल मचाई! दिन रात अब उसके ही हो गए,हम तो उसकी मासूम शरारतों में खो गए! जी भरकर उस पर प्यार लुटाया, कभीप्यार से तो कभी गुस्से से ममता को जताया! अपनी तोतली जबां से जब उसने (मां) कहकर बुलाया, उस एक शब्दContinue reading “( एक नन्ही परी )”
( भाई-बहन )
भाई-बहन की यारी सबसे प्यारी होती है,हर रिश्ते से न्यारी और सब पर भारी होती है! लड़े ना एक-दूजे से तो बेचैनी होती है,एक-दूजे की खिंचाईं से ही मस्ती पूरी होती है! चोटी ना खींचे भाई बहन की जब तक उसके हाथों में खुजली होती है, और भाई को पिटवाकर ही बहन को तसल्ली होतीContinue reading “( भाई-बहन )”
( सहेलियां)
वो बचपन की सहेलियां, जिनके संग की अठखेलियाँ, मिलकर खेले सब बचपन के खेल स्टापू, लूडो, छुपन- छुपाई और कौड़ीयां, जाने खेल-खेल में मिलकर बनाई ,कितने गुड्डै-गुड़ियों की जोड़ियां, जिनके संग खूब खाई हमने,चाट, पकौड़े,जलेबी और कचौड़ियां, एक-दूजे संग बांटते थे कपड़े हों या चूड़ियां! लड़ते-झगड़ते पर सह नहीं पाते थे एक-दूजे से दूरियां, एक-दूजेContinue reading “( सहेलियां)”
( हमारे दादू )
दादू हमारे सबसे प्यारे , रहे हमेशा दिल मे हमारे। उसूल उनके सबसे न्यारे, शरारतों में रहते साथ हमारे। हमको दिए पल प्यारे-प्यारे, अपने प्यार से हमारे हर पल हैं सँवारे । क्यो कर लिए हमसें किनारें, हमें छोड़ क्यों गए भगवान के द्वारे । हर पल दिल आपको ही पुकारे, आप ही तो थेContinue reading “( हमारे दादू )”
( मॉर्डन माता पिता )
कहते हैं हमारे बुज़ुर्ग सयानें ,टी.वी ने बिगाड़े वरना हमारे बच्चे भी थे सयानें । टी .वी से बिगड़े है ये कौन जाने,दबी इच्छाओं ने पंख खोले है ये भी तो मानें । बंध जाए पंछी तो फड़फड़ाते है,मिलते ही पहला मौक़ा छूट जाते हैं। टी.वी तो हमको करता है सचेत,पर देख चमक इन सितारोंContinue reading “( मॉर्डन माता पिता )”
मित्रों की आपातकालीन मिटिंग
कल शर्मा जी ने अपने मित्रों की आपातकालीन मिटिंग बुलाई, मिटिंग में सभी से मदद की गुहार लगाई! बोले बचा लो, बचा लो मुझे मेरे भाई, नहीं करोगे कुछ तुम तो , होगी मेरे ही घर से आज मेरी विदाई, हमने पूछा ऐसा क्या हुआ जो ये विपदा है आई, तब शर्मा जी ने अपनीContinue reading “मित्रों की आपातकालीन मिटिंग”
