(निरंतर प्रयास )

सपनों की राह पर जब भी कदम बढाएंगे
जलने वाले जलते है जलते रहेंगे,
हमें पथ से भटकाने का प्रयास करते रहेंगे,
कांटे राहों में हमारी निरंतर बोते रहेंगे,
पैर कितने भी हो जाएं इन कांटों से जख्मी,
हम सफलता पाने का प्रयास करते रहेंगे,
कभी तो किस्मत का पन्ना पलट पाएंगे,
कभी तो सफलता का रसास्वादन कर पाएंगे! 
तब तक ना रुकेंगे, ना थकेंगे, ना गिरने के डर से घबराएगें, सफलता की राहों पर बेखोफ, बेधड़क बढ़ते ही जाएंगे,आएगा एक वक्त ऐसा भी यारों अपनें माता-पिता की पहचान बन जाएंगे,तब माता-पिता भी कहेंगे गर्व से सबको, अब हम इसके नाम से जाने जाएंगे!

पति पत्नी संवाद ( व्यंग)

पत्नी पति से पूछती है-ऐसा क्या तुम मेरे लिए करते आ रहे हो, जब से हुई है शादी, बस ताने और फबतियाँ ही कसते जा रहे हो।

पति बोला तुम्हें ख़ुश करने के लिए, कितने पापड़ बेलता जा रहा
बेख़ौफ़-बेधड़क से, सहनशक्ति की मूर्ती में परिवर्तित होता जा रहा हूँ

सिर्फ़ तुम्हारे लिए ही , तुम्हारे मायके वालों को सहन करता जा रहा हूँ ,
बारूद दिया है तुम्हारे पिता ने, फिर भी अपना क़ीमती हीरा दिया है यही बता रहा हूँ ।

कैसी भी दुश्मनी निभाई हो , फिर भी उनके आगे नत्मस्तक होता आ रहा हूँ ,
कैसा भी हो तुम्हारे साथ जीवन प्रिय, सभी को अच्छे करमों का फल ही बता रहा हूँ ।।

स्वार्थ

झूठ ही बिकता है आज बाजारों में, झूठ ही है रिश्तों में,

झूठ ही व्यवहारों में, हर कोई मुखौटे लगा घूम रहा झूठ के गलियारों में,

इच्छापूर्ती के लिए गलत राह अपनाकर, अब शांति ढूंढे मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों में!

।।बचपन की यादें ।।

बचपन की यादों में खोया है मन,ढूँढ रहा है दिल वो बचपन ।

जिसमें न ही थी चिंता ना ही उलझन,बेख़बर,बेफ़िक्र था ये मनमौजी मन।

बहन,भाइयों की यादों का सुनहरा दर्पण ,बिखर गया कैसे इसका हर कण-कण।

कर रहा है ये घायल हमारा अंतरमन ,यादों के ये टुकड़े दे रहे हैं चुभन,

कभी याद कर होती है घुटन,तो कभी गुदगुदा जाता है मन।

माँ का गोद में सिर रख वो प्यार से सहलाना,पिता का उँगली पकड़कर चलाना,

गिरने पर प्यार से गले लगाना ।दादा-दादी का हर ग़लती पर समझाना,और माता-पिता की हर डाँट से बचाना।

स्कूल कॉलेज का वक़्त सुहाना,दोस्तों के संग मौज उड़ाना ,संग यारों के हर फ़िक्र भूल जाना।

दिल देख रहा है ये कैसा सपना,काश पलट सकते हम वक़्त का वो पन्ना,और फिर से जी लेते बहन-भाइयों और यारों संग बचपन अपना ।।

मां-बाप के प्यार को कोई भी भूल पाता नहीं,

सच्चा प्रेम करने वाला प्रेम मे दिखावा करता नहीं ।

बच्चे के रोने से ही जो हर बात समझ ले माँ-बाप होते हैं वही,

केवल यही रिश्ता है जिसमें किसी दिखावे की आवश्यकता होती नहीं ।

जहाँ प्रेम को दिखाना पड़े वहाँ प्रेम की भावना होती ही नहीं

,निस्वार्थ प्रेम कीजिए जिसमें कुछ खोने का डर होता नहीं

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